Friday, 18 December 2020

अब, मैं तुम्हें बहुत याद करता हूँ

दिल के किसी कोने मैं बिखरे हुए यादों के टुकड़ों से फरियाद करता हूँ,

ऐ मेरे दोस्त, अब, मैं तुम्हें बहुत याद करता हूँ।


मेरा हर वक़्त तेरा है, तेरा नासूर मेरा है।

वो तेरी नादान सी आँखें, उनमें हर अश्क़ मेरा है।

इबादत रब की ऐ हमदर्द, मैं अब तेरे बाद करता हूँ

ऐ मेरे दोस्त, अब, मैं तुम्हें बहुत याद करता हूँ।


कभी तू हँसता भी होगा, कभी नम होती होंगी तेरी आंखें।

बदकिस्मत हूँ बेगैरत जो तेरे पास न मैं हूँ।

तेरे हर मर्ज़ की, हर दर्द की मुकम्मल दवा, हाँ मैं हूँ।

पल प हाँ अपनी ज़िंदगी उसके दिए हुए तोहफे को मैं बर्बाद करता हूँ,

बस कह नही पाता पर अब, मैं तुम्हें बहुत याद करता हूँ।


हर एक पल तेरे साथ का दिल मैं धँसा सा है,

ज़िन्दगी के किस शहर की किस गली ले जाएगी किस्मत, ये पँछी फंसा से है।

वो तेरा बेवजह सी बात पर ज़ालिम से यूँ लड़ना,

खो गया अब सभी भूला मैं हर बेबात पे हँसना।

मैं हंसता हूँ ग़मों मैं अब, खुशी मैं आह भरता हूँ,

ऐ मेरे दोस्त, अब, मैं तुम्हें बहुत बहुत बहुत याद करता हूँ।

                                                               -   Avtar Surothiya



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